Use of Mirror in hindi

गोलीय दर्पण क्या होते है, उत्तल दर्पण (convex mirror) और अवतल दर्पण (concave mirror) का उपयोग क्या है, रेगिस्तान में मरीचिका क्यों बनती है, तारे क्यों टिमटिमाते है इन सभी प्रश्नों के उत्तर Use of Mirror नामक आर्टिकल में बताए गए है

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Use of Mirror in hindi

उत्तल दर्पण का उपयोग (Use of Mirror) –

  1. सोडियम परावर्तक लेम्प में
  2. गाड़ी में चालक की सीट के पास पीछे के दृश्य को देखने के लिए

अवतल दर्पण का उपयोग (Use of Mirror) –

  1. सोलर कुकर में
  2. दाढ़ी बनाने वाले सीसे के रूप में
  3. गाड़ी के हेड लाइट एवम सर्चलाइट में
  4. आँख, कान एवम नाक के डाक्टर के द्वारा

पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उदाहरन –

  1. हीरे का चमकना
  2. रेगिस्तान में मरीचिका का बनना
  3. जल में पड़ी परखनली का चमकना
  4. कांच में आई दरार का चमकना

प्रकाश का अपवर्तन के कारण होने वाली घटनाए –

  1. तारो का टिमटिमाना
  2. सूर्योदय से पहले एवम सूर्यास्त के बाद भी सूर्य का दिखाई देना
  3. द्रव्य में अंशत डूबी हुई सीधी छड़ टेढ़ी दिखाई पड़ना
  4. पानी से भरे किसी बर्तन की तली में पड़ा हुआ सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देना

प्रकाशित तन्तु का उपयोग –

  1. प्रकाश सिग्नलों के दूर संचार में
  2. शरीर के अंदर लेसर किरणों को भेजने में
  3. मनुष्य के शरीर के आंतरिक भागो का परिक्षण करने में
  4. विधुत सिग्नल को प्रकाश सिग्नल में बदलकर प्रेषित करने में तथा अभिग्रहण करने में

यदि दो समतल दर्पण θ° कोण पर झुके हो तो उनके बीच रखी वस्तु के प्रतिबिंबो की संख्या की गणना निम्न प्रकार से की जाती है –

  1. यदि (360/θ) एक सम संख्या आए तो प्रतिबिम्बों की संख्या वस्तु की सभी स्थितियों के लिए n = (360/θ) – 1
  2. यदि (360/θ) एक विषम संख्या आए तो प्रतिबिम्बों की संख्या n = (360/θ)होगी, यदि वस्तु दोनों दर्पणों के बीच के कोण के समद्विभाज्क पर नही हो
  3. यदि (360/θ) एक विषम संख्या हो और वस्तु दोनों दर्पणों के बीच के कोण के समद्विभाज्क पर रखी हो तो प्रतिबिम्बों की संख्या n = (360/θ) – 1 होगी
  4. यदि (360/θ) एक भिन्न संख्या हो तो प्रतिबिम्बों की संख्या उसके पूर्णाक के बराबर होगी

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