ईंधन (Fuel)

वह पदार्थ, हवा में जलकर बगैर अनावश्यक उत्पाद के ऊष्मा उत्त्पन्न करता है, ईंधन या ज्वलनशील पदार्थ कहलाता है। एक अच्छे ईंधन (Fuel) के निम्नलिखित गुण होने चाहिए आज हम जानेगे कि एक आदर्श ईंधन किसे कहते है और इसकी विशेषता क्या है। कोयला कितने प्रकार का होता है। घरों में प्रयुक्त होने वाली गैस कौन सी है और पावर एल्कोहल किसे कहते है तो चलिए सुरु करते है -
ईंधन
  1. वह सस्ता एवं  उपलब्ध होना चाहिए 
  2. उसका उष्मीय मान उच्च होना चाहिए 
  3. जलने के बाद उससे अधिक मात्रा में अवशिष्ट पदार्थ नहीं बचना चाहिए 
  4. जलने के दौरान या बाद कोई हानिकारक पदार्थ नहीं उत्त्पन्न होना चाहिए। 
  5. उसका जमाव, परिवहन आसान, जलना नियंत्रित प्रज्वलन ताप निम्न होना चाहिए 

ईंधन (fuel) का उष्मीय मान (Calorific Value of Fuels)

किसी ईंधन का उष्मीय मान ऊष्मा की वह मात्रा है, जो उस ईंधन के एक ग्राम को वायु या आक्सीजन में पूर्णतः पश्चात प्राप्त होती है।

किसी भी अच्छे ईंधन का उष्मीय मान अधिक होना चाहिए सभी इंधनो में हाइड्रोजन का उष्मीय मान सबसे अधिक होता है परन्तु सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उपयोग आमतौर पर नहीं किया जाता है। हाइड्रोजन का उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में तथा उच्च ताप उत्त्पन्न करने वाले ज्वालको में किया जाता है। हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी कहा जाता है।

अपस्फोटन (knocking) व ऑक्टेन संख्या (Octane number) –

कुछ ईंधन ऐसे होते है जिनका वायु मिश्रण का इंजनों के सिलेंडर में ज्वलन समय के पहले हो जाता है,

और जिससे ऊष्मा पूर्णतया कार्य में परिवर्तित न होकर धात्विक ध्वनि उत्त्पन्न करने में नष्ट हो जाती है।

यही धात्विक ध्वनि अपस्फोटन कहलाती है। ऐसे ईंधन जिनका अपस्फोटन अधिक होता है, उपयोग के लिए उचित नहीं मने जाते है।

अपस्फोटन कम करने के लिए ऐसे इंधनो में अपस्फोटरोधी यौगिक मिला दिए जाते है। जिससे इनका अपस्फोटन कम हो जाता है।

सबसे अच्छा अपस्फोटरोधी योगिक टेट्रा एथिल लेड (TEL) है। अपस्फोटन को ऑक्टेन संख्या के द्वारा व्यक्त किया जाता है।

किसी ईंधन, जिसकी ऑक्टेन संख्या जितनी अधिक होती है, का अपस्फोटन उतना ही कम होता है तथा वह उतना ही उत्तम ईंधन माना जाता है।

ईंधन (fuel) का वर्गीकरण –

भौतिक अवस्था आधार पर ईंधन को निम्न प्रकार बांटा गया है –

  1. ठोस ईंधन : लकड़ी, कोयला, चारकोल, कोक आदि। 
  2. द्रव ईंधन : पेट्रोल, स्प्रिट, डीजल, ईथर किरासन, अल्कोहल आदि। 
  3. गैसीय ईंधन : प्राकृतिक गैस, कोल गैस, प्रोड्यूसर  गैस, गोबर गैस आदि। 

कोयला –

कार्बन के आधार पर कोयला चार प्रकार के होते है –

पीट कोयला :

इसमें कार्बन की मात्रा 50% से 60% होती है

इसे जलाने पर अधिक रख एवं धुआँ निकलता है।

यह सबसे निम्न कोटि का कोयला है।

लिग्नाइट कोयला :

कोयला इसमें कार्बन की मात्रा 65% से 70% तक होती है।

इसका रंग भूरा होता है, इसमें जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है।

बिटुमिनस कोयला :

इसे मुलायम कोयला भी कहा जाता है। इसका उपयोग घरेलू कार्यो में होता है।

इसमें कार्बन की मात्रा 70% से 85% तक होती है।

एन्थ्रासाइट कोयला :

यह कोयले की सबसे उत्तम कोटि है। इसमें कार्बन की मात्रा 85% से अधिक रहती है।

द्रव ईंधन :

पेट्रोल, डीजल, किरासन तेल, अल्कोहल, स्प्रिट सभी द्रव ईंधन के उदाहरण है।

गैसीय ईंधन (fuel) –

प्राकृतिक गैस :

यह पेट्रोलियम कुआ से निकलती है। इसमें 95% हाइड्रोकार्बन होता है, जिसमें 80% मीथेन रहता है।

घरों में प्रयुक्त होने वाली द्रवित प्राकृतिक गैस को एल. पी. जी. कहते है। यह ब्यूटेन एवं प्रोपाने का मिश्रण होता है, जिसे उच्च दाब पर द्रवित कर सिलेंडरों में भर लिया जाता है।

एल. पी. जी.

अत्यधिक ज्वलनशील होती है

अतः इससे होने वाली दुर्घटना से बचने के लिए इसमें सल्फर के यौगिक (मिथाइल मरकाप्टन) को मिला देते है, ताकि इससे रिसाव को इसकी गंध से पहचान लिया जाय।

गोबर गैस :

गीले गोबर (पशुओं के मल) के सड़ने पर ज्वलनशील मिठाने गैस बनती है, जो वायु की उपस्थिति में सुगमता से जलती है।

गोबर गैस संयंत्र में शेष रहे पदार्थ का उपयोग कार्बनिक खाद के रूप में किया जाता है।

प्रोड्यूसर गैस :

यह गैस लाल तप्त कोक पर वायु प्रवाहित करके बनायी जाती है।

इसमें मुख्यतः कार्बन मोनोक्साइड ईंधन का काम करता है।

इसमें 70% नाइट्रोजन, 25% कार्बन मोनोक्साइड एवं 4% कार्बनडाइ आक्साइड रहता है

इसका उष्मीय मान 1100 से 1750 kcal/ kg होता है।

कांच एवं इस्पात उद्योग में इसका उपयोग ईंधन के रैप में किया जाता है।

जल गैस :

इसमें हाइड्रोजन 49%, कार्बन मोनोक्साइड 45% तथा कार्बन डाइ आक्साइड 4.5% होता है।

इसका उष्मीय मान 2500 से 2800 kcal/ kg होता है।

इसका उपयोग हाइड्रोजन एवं अल्कोहल के निर्माण में अपचायक के रूप में होता है।

कोल गैस :

यह कोयले के भंजक आसवन से बनाया जाता है। यह  रंगहीन तीक्ष्ण गंध वाली गैस है।

यह वायु के साथ विस्फोटक मिश्रण बनती है। इसमें 54% हाइड्रोजन, 35% मीथेन, 11%  कार्बन मोनोक्साइड, 5% हाइड्रोकार्बन, 3% कार्बनडाइ आक्साइड होता है।

ईंधन का उष्मीय मान उसकी कोटि का निर्धारण करता है।

अल्कोहल

को जब पेट्रोल में मिला दिया जाता है, तो उसे पॉवर अल्कोहल (Power alcohol) कहते है, जो ऊर्जा का एक वैकल्पिक स्त्रोत है।

सिगरेट लाइटर में ब्यूटेन का प्रयोग होता है।