Carbon and its compounds

Carbon and its compounds मे हम कार्बन और उसके योगिकों (संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, प्लास्टिक, रबड़, थर्मोप्लास्टिक और रासायनिक रेशे) के बारे मे पढेगे

कार्बन एक अधातु है। इसकी परमाणु संख्या 6 है। इसे आधुनिक आवर्त सारणी के वर्ग IVA में रखा गया है।अपरूपता वैसे पदार्थ जिनके रासायनिक गुण समान एवं भौतिक गुण भिन्न हो अपरूप कहलाते है, और इस घटना को अपरूपता कहते है। आज हम कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and its compounds) प्रश्नोत्तरी के बारे में पढ़ेंगे आप कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its compounds pdf) के महत्वपूर्ण तथ्यों को भी जान सकते है। तो चलिए सुरु करते है –

कार्बन और उसके यौगिक
carbon and its compound
कार्बन और उसके यौगिक (carbon and its compound)

कार्बन के दो मुख्य अपरूप है : हीरा एवं ग्रेफाइट

हीरा के प्रमुख गुण :

  1. यह ताप एवं विद्युत का कुचालक होता है।
  2. यह दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है। यह किसी भी द्रव में नहीं घुलता है। इस पर अम्ल, क्षार आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  3. इसके वे घनाकार होते है।
  4. इसका अपवर्तनांक 2.417 होता है, अतः पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण यह बहुत चमकता है। इस पर रेडियम से निकलने वाली X-किरणों के पड़ने पर यह हरा रंग प्रदर्शित करता है।
  5. शुद्ध हीरा पारदर्शक एवं रंगहीन होता है।
  6. कुछ हीरे काले होते है, जिन्हें बोर्ट (Boart) कहते है। इसका उपयोग शीशा काटने में किया जाता है।

ग्रेफाइट के प्रमुख गुण :

  1. यह विद्युत का सुचालक होता है।
  2. इसका आपेक्षित घनत्व 2.2 होता है।
  3. कागज पर रगड़ने से यह उस पर कला निशान बना देता है, इसलिए इसको कला शीशा भी कहते है।
  4. ग्रेफाइट का उपयोग पेंसिल बनाने में, परमाणु भट्टी में, इलेक्ट्रोड के रूप में एवं कारण आर्क बनाने में किया जाता है।
  5. हीरा में कार्बन sp^3 एवं ग्रेफाइट में कार्बन sp^2 प्रसंकरित रहता है।

हाइड्रोकार्बन (Carbon and its compounds)

कार्बन एवं हाइड्रोजन के यौगिक को हाइड्रोकार्बन कहते है। हाइड्रोकार्बन का एक प्राकृतिक स्त्रोत पेट्रोलियम (कच्चा तेल) है, जिसे प्रकृति द्वारा पृथ्वी में कुछ विशेष प्रकार के अवसादी चट्टनों के बीच बने भण्डारो में संरक्षित किया गया है।

हाइड्रोकार्बन तीन प्रकार के होते है :

संतृप्त हाइड्रोकार्बन :

जिस हाइड्रोकार्बन में प्रत्येक कार्बन परमाणु की चारो संयोजकताएँ एक सहसंयोजी आबंधो द्वारा संतुष्ट होती है, उसे संतृप्त हाइड्रोकार्बन या एल्केन कहते है। एल्केन श्रेणी का सामान्य सूत्र C(n)H(2n + 2)द्वारा दर्शाया जा सकता है, जहाँ n किसी अणु में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या दर्शाता है मीथेन, इथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन आदि एल्केन के प्रमुख उदाहरण है।

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन :

वे हाइड्रोकार्बन जिनमे कम-से-कम दो निकटस्थ कार्बन परमाणु आपस में द्विबंध अथवा त्रिबंध बनाकर अपनी संयोजकता को संतुष्ट करते है असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते है। द्विबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को एल्कीन कहते है। एल्कीन श्रेणी का सामान्य रासायनिक सूत्र C(n)H(2n) होता है। इस श्रेणी का पहला सदस्य एथीन (C2H4) है त्रिबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को एल्काइन कहलाता है एल्काइन का सामान्य सूत्र C(n)H(2n-2) होता है। सबसे सरल एल्काइन एथाइन (C2H2) है।

ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन :

बेंजीन सरलतम एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन है। इसकी संरचना वल्य होती है।

समावयवता : जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान होते है, परन्तु उनके गुणों में अंतर होता है तब इस विशेष गुण को समावयवता कहते है और प्राप्त यौगिक एक-दूसरे के समावयवी कहलाते है। इसके दो मुख्य प्रकार है –

संरचनात्मक समावयवता – यह परमाणु के भिन्न बँधो के कारण उतपन्न होती है।

त्रिविम समावयवता – यह अंतरिक्ष में परमाणुओं के भिन्न प्रबंध के कारण उत्पन्न होती है।

बहुलकीकरण (Carbon and its compounds)

जब एक ही यौगिक के दो अथवा अधिक अनु आपस में संयोग करके एक बड़ा अनु बनाते है, तब इस अभिक्रिया को बहुलकीकरण खा जाता है। इस अभिक्रिया में भाग लेने वाले अनु को मोनोमर और उत्पाद को पॉलिमर कहते है।

बहुलकीकरण की विशेषताए :

इसमें एक ही यौगिक के अणु परस्पर संयोग करते है।

किसी भी अणु का निष्कर्षण नहीं होता है।

भूलक का अणुभार मूल यौगिक के अणुभार का गुणक होता है।

प्राकृतिक बहुलक के उदाहरण है – स्टार्च एवं सेल्यूलोज

प्लास्टिक :

प्राकृतिक प्लास्टिक का उदाहरण है -लाह।

रासायनिक विधि से तैयार प्लास्टिक दो प्रकार के होते है –

थर्मोप्लास्टिक :

यह गर्म करने पर मुलायम तथा ठंडा करने पर कठोर हो जाता है। इसमें यह गन सदैव मौजूद रहता है चाहे इसे कितनी बार ठंडा व् गर्म किया जाय। जिन कार्बनिक यौगिकों के अंत में एक द्विबंध रहता है, उनके योग बहुलकीकरण से थर्मोप्लास्टिक्स बनते है। उदाहरण – पलिस्टैरिन, पॉलीथीन, नायलॉन तथा पॉलीवाइनिल क्लोराइड, टेफ्लिन आदि।

  • पालीथीन, एथिलीन (C2H4)को उच्च दाब पर बहुलकीकरण के फलस्वरूप प्राप्त होता है। इसका उपयोग तार के ऊपर का आवरण, पैकिंग थैलिया बनाने में होता है।
  • पोलिस्टाइरीन, फेनिल एथिलीन के बहुलकीकरण के फलस्वरूप प्राप्त होता है। इसका उपयोग अम्ल रखने की बोतल, सेलों के कवर आदि बनाने में होता है।
  • पॉली विनाइल क्लोराइड, वायनिल क्लोराइड के बहुलकीकरण से प्राप्त होता है इसका उपयोग पतली चादरे, फिल्म, बरसाती सीट कवर आदि बनाने में होता है।

थर्मोसेटिंग प्लास्टिक – यह वह प्लास्टिक है, जो पहली बार गर्म करते समय मुलयम हो जाता है और उसे इच्छित आकर में ढाल लिया जाता है।  इसे पुनः गर्म करके मुलयम नहीं बनाया जा सकता है। इस प्रकार के अनुत्क्रमणीय बहुलको को ताप दृढ़ भूलक कहते है। उदाहरण – बैकेलाइटतथा मेलामाइन।

बैकलाइट – यह फाइनल तथा फार्मल्डिहाइड को सोडियम हइड्रोक्साइड की उपस्थिति में गर्म करके प्राप्त किया जाता है।

इसका उपयोग रेडियो, टेलीविजन आदि के केस, बाल्टी आदि बनाने में किया जाता है।

रबड़ : 

रबड़ दो प्रकार का होता है –

प्राकृतिक रबड़ : यह आइसोप्रीन का बहुलक होता है, यह थर्मोप्लास्टिक है।

वल्कनीकरण : प्राकृतिक रबड़ को सलफल के साथ मिलाकर गर्म करने की क्रिया वल्कनीकरण कहलाता है। इसके बाद रबड़ एक निश्चित आकार ग्रहण कर लेता है। इस प्रकार के रबड़ का उपयोग दस्ताना, रबर बैंड बनाने में किया जाता है।

रबर आसानी से कार्बन डाइसल्फाइड में घुल जाता है।

प्राकृतिक रबड़ काफी मुलायम होता है, इसे कठोर बनाने के लिए इसमें कार्बन मिलाया जाता है, तब इसका प्रयोग ट्यूब, टायर आदि बनाने में किया जाता है।

संश्लिष्ट रबड़

नियोप्रिन : 2-क्लोरोब्यूटाडाइन के बहुलकीकरण से बनता है। इसका उपयोग विधुत रोधी पदार्थ, विद्युत तर, कन्वेयर बेल्ट खनिज तेल ले जाने वाले पाइप बनाने में किया जाता है।

थाईकाल : यह दूसरा कृत्रिम रबड़ है, जो डाइक्लोरो इथेन को पालीसल्फाइड की प्रतिक्रिया से बनाया जाता है। इसका उपयोग खनिज तेलले जाने वाले पाइप बनाने में, विलायक जमा करने वाला टैंक आदि बनाने में किया जाता है।

रेशे : वे क्ष्रखला-युक्त ठोस जिनकी लम्बाई, चौड़ाई की अपेक्षा सेंकडो या हजारों गुना अधिक हो, रेशे कहलाते है।

रासायनिक रेशे (Carbon and its compounds)

नायलॉन : 

नायलॉन शब्द न्यूयार्क शहर के ‘NY’ तथा लंदन के ‘LON’ को मिलाकर बनाया गया है। नायलॉन ऐसे छोटे कार्बनिक अणुओं के बहुलकीकरण प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है, जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह एक पॉली एमाइड रेशा बनाने के लिए, दो एमिन (-NH2) समूह-युक्त किसी कार्बनिक यौगिक की अभिक्रिया किसी ऐसे कार्बनिक यौगिक के साथ की जाती है, जिसमे कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) के दो समूह हो। नायलॉन मानव द्वारा संश्लिष्ट किया गया पहला रेशा था, इसका निर्माण सर्वप्रथम सन 1935 ईस्वी में किया गया था तथा व्यापारिक स्तर पर पहली बार सन 1939 ईस्वी में महिलाओं के लिए जुरवे इससे बनाई गयी। नायलॉन का उपयोग मछली पकड़ने के जाल में, पैरासूट के कपड़ा में, टायर, दन्त ब्रश, पर्वतारोहण के लिए रस्सी आदि में होता है।

रेयॉन :

सेल्यूलोज से बने कृत्रिम रेशे को रेयान कहते है। रेयान बनाने के लिए सेल्यूलोज कागज की लुगदी या काष्ठ  जाता है।  इसे सांद्र तथा ठन्डे सोडियम हाइड्रोक्साइड तथा कार्बन डाइसल्फाइड से उपचारित करते है, उसके बाद इस सेल्यूलोज के विलयन को धातु बेलनों में बने छिद्रो में से होकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में गिराया जाता है। यह इसके लम्बे-लम्बे तंतु बन जाते है। रेयान रासायनिक दृष्टि से सूत के समान है। रेयान का उपयोग कपड़ा बनाने में, कालीन बनाने में, चिकित्सा-क्षेत्र में लिंट या जाली बनाने के लिए किया जाता है।

पॉलिएस्टर : 

इसे इंग्लैंड में विकसित किया गया था। इसे संश्लिष्ट करने के लिए दो हाइड्रोक्सिल (-OH) समूह-युक्त कार्बन यौगिक की अभिक्रिया दो कार्बोक्सिलिक (-COOH) समूह के यौगिक के साथ की जाती है। हाइड्रोक्सिल तथा कार्बोक्सिलिक समूह के मध्य अभिक्रिया के परिणामस्वरूप एस्टर समूह बनता है चूँकि इस रेशे में अनेक एस्टर समूह होते है, इसलिए इसे पॉलिस्टर कहते है। पॉलिएस्टर का उपयोग कपड़े के रूप में, पाल नौकाओं का पाल बनाने में, अग्नि शमन के प्रयुक्त हौज पाइप बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है।

कार्बन फाइबर :

कार्बन फाइबर कार्बन परमाणुओं की लम्बी शृंखला से बने होते है। इनका संक्षारण नहीं होता है। इसका निर्माण संश्लिष्ट रेशो को आक्सीजन की अनुपस्थिति में गर्म करके किया जाता है, जिससे रेशे अपघटित होकर कार्बन फाइबर उत्त्पन्न करंट है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यान तथा खेलकूद की सामग्री बनाने में होता है।

पेट्रोलियम उद्योग : 

पेट्रोलियम प्राय प्राकृतिक गेश के निचे पाया जाता है। कच्चे पेट्रोलियम को प्रभाजी आसवन के द्वारा शुद्ध किया जाता है। इसमें भिन्न-भिन्न क्वथनांक पर संघनित परभज पृथक-पृथक इक्क्ठे कर लिए जाते है, जिसे पेट्रोलियम का उत्पाद कहा जाता है।